"कुछ लोग तुम्हें समझाएँगे
वो तुम को ख़ौफ़ दिलाएँगे
जो है वो भी खो सकता है
इस राह में रहज़न हैं इतने
कुछ और यहाँ हो सकता है
कुछ और तो अक्सर होता है
पर तुम जिस लम्हे में ज़िंदा हो
ये लम्हा तुम से ज़िंदा है
ये वक़्त नहीं फिर आएगा
तुम अपनी करनी कर गुज़रो
जो होगा देखा जाएगा
- फ़हमीदा रियाज़"
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"धूप तो धूप ही है इसकी शिकायत कैसी
अब की बरसात में कुछ पेड़ लगाना साहब
- Nida Fazli"
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"बहुत बोलूं तो ज्ञान घटे,
सुनू बहुत तो घटे मूल विचार,
मयूरा मन एकान्त मौन ही साधिए,
मूल सृजन की शक्ति बढ़े अपार।"
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