दाएम आबाद रहेगी दुनिया
हम न होंगे कोई हम सा होगा
दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तिरी याद थी अब याद आया
नासिर काज़मी
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ज़िंदगी शायद इसी का नाम है
दूरियाँ मजबूरियाँ तन्हाइयाँ
कैफ़ भोपाली
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तुम ज़माने की राह से आए
वर्ना सीधा था रास्ता दिल का
बाक़ी सिद्दीक़ी
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इन्हीं पत्थरों पे चल कर अगर आ सको तो आओ
मिरे घर के रास्ते में कोई कहकशाँ नहीं है
मुस्तफ़ा ज़ैदी
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