Wednesday, 17 December 2025

29/2025

दाएम आबाद रहेगी दुनिया

हम न होंगे कोई हम सा होगा


दिल धड़कने का सबब याद आया

वो तिरी याद थी अब याद आया


नासिर काज़मी

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ज़िंदगी शायद इसी का नाम है

दूरियाँ मजबूरियाँ तन्हाइयाँ


कैफ़ भोपाली


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तुम ज़माने की राह से आए

वर्ना सीधा था रास्ता दिल का


बाक़ी सिद्दीक़ी


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इन्हीं पत्थरों पे चल कर अगर आ सको तो आओ

मिरे घर के रास्ते में कोई कहकशाँ नहीं है

 

मुस्तफ़ा ज़ैदी

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